उत्तराखंड में टिहरी जिले के थौलधार क्षेत्र में पिछले काफी समय से सक्रिय एक खूंखार भालू ने गुरुवार को हमला कर एक वन दरोगा (फॉरेस्टर) समेत तीन व्यक्तियों को घायल कर दिया। घटना के बाद घायलों को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। आक्रोशित ग्रामीणों ने टिहरी के प्रभागीय वन अधिकारी (DFO) पुनीत तोमर को हटाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। इसके बाद भालू को मारने के आदेश जारी कर दिए गए। विधायक ने भी आदमखोर भालू को मारने की अपील की है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, थौलधार ब्लॉक के चंबा-धरासू राजमार्ग पर सुल्याधार क्षेत्र में पिछले काफी समय से खूंखार भालू सक्रिय है, जिसने पिछले महीने हमला कर एक महिला को गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इस घटना के बाद से वन विभाग की एक टीम क्षेत्र में लगातार गश्त कर रही है।
काफी देर तक लड़ते रहे भालू से
ग्रामीण जब गुरुवार को गश्ती दल को भालू की गतिविधि वाला क्षेत्र दिखाने के लिए गए तो वहां पहले से घात लगाए बैठे भालू ने उन पर अचानक हमला बोल दिया। भालू के हमले में वन दरोगा अजयपाल पंवार, बेरगणी गांव के ग्राम प्रधान युद्धवीर सिंह रावत तथा एक अन्य ग्रामीण विनोद रावत घायल हो गए। तीनों व्यक्तियों ने काफी देर तक भालू का मुकाबला किया और उसे भागने पर मजबूर कर दिया लेकिन इस दौरान विनोद रावत के चेहरे पर भालू के नाखूनों के गहरे जख्म हो गए।
घायलों को अस्पताल पर कराया गया भर्ती
वन दरोगा और ग्राम प्रधान को भी चोटें आईं। ग्रामीण किसी तरह कंधों पर लादकर घायलों को सड़क तक लाए। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उन्होंने जब घटना की सूचना डीएफओ को दी तो उन्होंने भालू के हमले के सबूत मांगे जिससे गुस्साए ग्रामीण एंबुलेंस के माध्यम से घायलों को अस्पताल ले जाने की बजाय टिहरी के जिलाधिकारी कार्यालय पहुंच गए।
वन विभाग के खिलाफ नारेबाजी
ग्रामीणों ने वहां डीएफओ तोमर को हटाने की मांग करते हुए प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों में पूर्व कैबिनेट मंत्री दिनेश धनाई भी शामिल रहे। टिहरी के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) डॉ. श्याम विजय अपनी टीम के साथ जिला समाहरणालय परिसर पहुंचे और वहीं घायलों का प्राथमिक उपचार किया गया। इसके बाद घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया।
गश्ती दल को नहीं दिए गए कोई हथियार
सीएमओ ने बताया कि सभी घायलों की स्थिति खतरे से बाहर है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि डीएफओ को भालू के खतरनाक होने की जानकारी दी गयी थी लेकिन इसके बावजूद गश्ती दल को विभाग की ओर से अपनी सुरक्षा के लिए लाठी-डंडों के अलावा अन्य कोई हथियार नहीं दिए गए। उन्होंने कहा कि यदि गश्ती दल के पास बंदूक होती तो लोग घायल नहीं होते और हमलावर हो चुका भालू भी मारा गया होता।
भालू को शूट करने का आदेश
बाद में मौके पर पहुंची टिहरी की मुख्य विकास अधिकारी (CDO) वरूणा अग्रवाल तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को किसी तरह शांत किया। डीएफओ तोमर भी कलेक्ट्रेट धरना स्थल पर पहुंचे और ग्रामीणों से माफी मांगी। इस बीच, सीडीओ ने बताया कि भालू को खत्म करने के लिए उच्च स्तर से आदेश हो चुके हैं। जल्द ही प्रभावित क्षेत्र में शूटर और अन्य कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
विधायक ने कहा- नहीं मारा गया तो करेंगे आंदोलन
देहरादून में टिहरी जिले के प्रतापनगर से कांग्रेस विधायक विक्रम सिंह नेगी ने प्रमुख वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपा और चेतावनी दी कि यदि भालू को जल्द मारा नहीं गया तो ग्रामीणों के साथ वह भी आंदोलन करने को बाध्य होंगे।